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पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के भूमि विवाद पर सरकार का बड़ा एक्शन, हुरहुरु की 50 डिसमिल खास महल जमीन वापस लेने की प्रक्रिया अंतिम चरण में

Shashi Kant 27 Jul 2026, 04:23 PM 623 views
पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के भूमि विवाद पर सरकार का बड़ा एक्शन, हुरहुरु की 50 डिसमिल खास महल जमीन वापस लेने की प्रक्रिया अंतिम चरण में
उपायुक्त की अनुशंसा पर प्रमंडलीय आयुक्त की मुहर, फाइल पहुंची रांची; कैंटोनमेंट मौजा के तीन प्लॉटों का लीज पट्टा रद्द करने की तैयारी
हजारीबाग। हजारीबाग शहर के हुरहुरु (कैंटोनमेंट मौजा) स्थित 50 डिसमिल खास महल जमीन से जुड़े बहुचर्चित भूमि विवाद में प्रशासनिक कार्रवाई निर्णायक दौर में पहुंच गई है। पूर्व मंत्री योगेंद्र साव से जुड़े इस मामले में जिला प्रशासन और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल की अनुशंसा के बाद अब राज्य सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के स्तर पर अंतिम निर्णय की प्रक्रिया चल रही है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार संबंधित जमीन का लीज पट्टा रद्द कर उसे पुनः सरकारी खाते में दर्ज करने की कार्रवाई अंतिम चरण में है। सरकारी अभिलेखों के मुताबिक, हजारीबाग उपायुक्त ने पत्रांक 220, दिनांक 31 मई 2025 के माध्यम से अभिलेख संख्या 155/2007-08 की जांच के आधार पर जमीन पुनर्ग्रहण का प्रस्ताव प्रमंडलीय आयुक्त को भेजा था। इसके बाद उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल आयुक्त कार्यालय के पत्रांक 929/रा (दिनांक 17 जून 2025) के जरिए इस अनुशंसा पर सहमति देते हुए पूरी फाइल अंतिम निर्णय के लिए झारखंड सरकार को भेज दी गई। दस्तावेजों के अनुसार विवादित भूमि कैंटोनमेंट मौजा (थाना संख्या-157) के भवन पट्टा होल्डिंग संख्या-302 के अंतर्गत आती है। कुल 0.50 एकड़ (50 डिसमिल) क्षेत्रफल वाली इस जमीन में प्लॉट संख्या 872/1235 (0.25 एकड़), 873/1336 (0.15 एकड़) और 893/1337 (0.10 एकड़) शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि लीज की शर्तों के उल्लंघन एवं अन्य आरोपों के आधार पर इन भूखंडों का पट्टा रद्द कर जमीन को पुनः सरकारी अभिलेख में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हाल के दिनों में इस जमीन को लेकर विभिन्न स्तरों पर कई तरह के दावे किए जा रहे थे, लेकिन प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए आधिकारिक पत्र के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जिला प्रशासन और प्रमंडल स्तर पर जमीन पुनर्ग्रहण की अनुशंसा की जा चुकी है। अब अंतिम फैसला राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, झारखंड सरकार के स्तर पर होना है। यदि विभाग प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो हुरहुरु स्थित इस बहुमूल्य खास महल भूमि का लीज पट्टा औपचारिक रूप से समाप्त कर उसे पुनः सरकारी स्वामित्व में दर्ज किया जाएगा। इस मामले पर अब प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों हलकों की निगाहें टिकी हुई हैं।